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पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र और बाघ गलियारे के विरोध ने सह्याद्रि संरक्षण पर उठाए सवाल

By SAMEER JEEVANRAO KATAKE • 2026-09-12 07:34 • 1 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र और बाघ गलियारे के विरोध ने सह्याद्रि संरक्षण पर उठाए सवाल

सह्याद्रि संरक्षण में ESZ और बाघ कॉरिडोर की भूमिका, स्थानीय विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती

कोल्हापुर, महाराष्ट्र | संवाददाता

कोल्हापुर जिले के राधानगरी, गगनबावड़ा और भुदरगढ़ तालुकों में पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ESZ) और बाघ कॉरिडोर से जुड़े संरक्षण उपायों को लेकर पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय विकास के बीच संतुलन को लेकर चर्चा जारी है।

सह्याद्रि क्षेत्र पश्चिमी घाट की जैव-विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां विभिन्न प्रकार के पौधों, वन्यजीवों, पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं की प्रजातियां पाई जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अनियोजित निर्माण, आवास विखंडन और बढ़ता मानवीय दबाव ऐसे पारिस्थितिक तंत्रों के लिए चुनौती बन सकते हैं।

दूसरी ओर, स्थानीय किसानों और निवासियों के बीच यह चिंता भी सामने आती रही है कि संरक्षण से जुड़े नियमों का प्रभाव कृषि, पारंपरिक आजीविका और क्षेत्र में होने वाले भविष्य के विकास कार्यों पर पड़ सकता है। ऐसे में संरक्षण संबंधी निर्णयों में स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों और स्थानीय समुदायों के बीच संतुलित संवाद के जरिए संरक्षण तथा विकास की जरूरतों को साथ लेकर चलने की आवश्यकता है। इसके लिए वैज्ञानिक और गांव-स्तरीय आकलन के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

सह्याद्रि पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के साथ स्थानीय आजीविका और विकास संबंधी जरूरतों का संतुलन इस क्षेत्र के लिए प्रमुख चुनौती बनी हुई है। आगे संरक्षण योजनाओं के प्रभाव और उनके क्रियान्वयन में स्थानीय परिस्थितियों तथा समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

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