चुनाव में धांधली केस वापस लेने पर हाईकोर्ट मंजूरी अनिवार्य
सुप्रीम कोर्ट का चुनावी मामलों पर बड़ा निर्देश, केस वापस लेने के लिए हाईकोर्ट की मंजूरी जरूरी
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी गड़बड़ी से जुड़े आपराधिक मामलों को वापस लेने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों को वापस लेने से पहले संबंधित राज्य हाईकोर्ट की मंजूरी लेना आवश्यक होगा। यह व्यवस्था सांसदों और विधायकों के साथ-साथ चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से जुड़े मामलों पर भी लागू होगी।
अदालत ने कहा कि राजनीतिक सत्ता में बदलाव के बाद आपराधिक मामलों को वापस लेना निष्पक्ष आपराधिक न्याय व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है। अदालत ने यह भी माना कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून के शासन को बनाए रखना जरूरी है।
कोर्ट ने जारी किए कई निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव के दौरान निगरानी और आपराधिक मामलों की जांच से जुड़े कई निर्देश भी दिए। इनमें चुनावी निगरानी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी मिलने पर संबंधित जांच एजेंसियों को सूचना देने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी को मामला दर्ज होने की तारीख से एक वर्ष के भीतर जांच पूरी करने का हर संभव प्रयास करना चाहिए। हालांकि, मामले की प्रकृति और जांच की परिस्थितियों के आधार पर प्रक्रिया अलग-अलग हो सकती है।
चुनावी राजनीति में काले धन की भूमिका पर चिंता जताते हुए अदालत ने लोकतंत्र, कानून के शासन और चुनावी प्रक्रिया के बीच मजबूत संबंध पर जोर दिया। अदालत के अनुसार, इन तीनों में से किसी एक से समझौता होने पर लोकतांत्रिक व्यवस्था और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के इन निर्देशों का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और राजनीतिक प्रभाव के कारण आपराधिक मामलों को मनमाने तरीके से वापस लेने की संभावनाओं को रोकना है।