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फाइलेरिया उन्मूलन में सामुदायिक भागीदारी पर मंथन 16 जनपदों की 53 प्लानिंग यूनिट्स में 19 नवंबर से शुरू होगा एमडीए अभियान सामुदायिक नेतृत्वकर्ता हुए सम्मानित

By SHYAM SINGH • 2026-10-14 10:42 • 6 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
फाइलेरिया उन्मूलन में सामुदायिक भागीदारी पर मंथन 16 जनपदों की 53 प्लानिंग यूनिट्स में 19 नवंबर से शुरू होगा एमडीए अभियान सामुदायिक नेतृत्वकर्ता हुए सम्मानित

लखनऊ, 13 अक्टूबर 2026

प्रदेश में फाइलेरिया उन्मूलन के प्रयासों को प्रभावी बनाने और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से मंगलवार को लखनऊ के एक होटल में राज्य स्तरीय बैठक आयोजित हुई। नवंबर में 16 जनपदों की 53 प्लानिंग यूनिट्स में प्रस्तावित सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान से पहले आयोजित इस बैठक में राज्य स्तरीय अधिकारियों सहित विभिन्न जनपदों से आए सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म (पीएसपी) के सदस्य, फाइलेरिया से प्रभावित लोग, कोटेदार, ग्राम प्रधान, स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि, शिक्षक, युवा स्वयंसेवक और विभिन्न विभागों के स्थानीय हितधारक शामिल हुए। बैठक में दवा सेवन के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाने और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर मंथन हुआ।
महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. पवन कुमार अरुण ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन के लिए केवल दवा वितरित करना पर्याप्त नहीं है। लोगों को दवा सेवन और बीमारी से बचाव के महत्व के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है।
क्षेत्रीय निदेशक, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डॉ. जुल्फिकार अहमद ने फ्रंटलाइन वर्कर्स की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे लोग नीतियां बनाते हैं, लेकिन समुदाय के लोगों तक कार्यक्रम को पहुंचाने में फ्रंटलाइन वर्कर्स की भूमिका अहम होती है।
राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ. ए.के. चौधरी ने कहा कि दवा के संभावित दुष्प्रभावों का डर, बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी, गलत धारणाएं, कामकाज की व्यस्तता और प्रवास जैसे कारणों से कई लोग दवा का सेवन नहीं करते। ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों को समझते हुए लोगों से निरंतर संवाद करना और उनकी आशंकाओं को दूर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में पीएसपी अहम भूमिका निभा रहा है। इसके सदस्य दवा सेवन से इनकार करने वाले परिवारों की पहचान करते हैं, उनके दवा न लेने के कारणों को समझते हैं और उन्हें दवा सेवन के लिए प्रेरित करते हैं। पीएसपी में समाज के हर वर्ग और विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं, जो सामुदायिक स्तर पर लोगों का भरोसा बढ़ाने में मदद करते हैं।
36 सामुदायिक नेतृत्वकर्ता हुए सम्मानित
एमडीए अभियान में योगदान के लिए फाइलेरिया चैंपियन, सीएचओ, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, एएनएम, ग्राम प्रधानों, कोटेदारों, सीएचओ-पीएसपी, शिक्षकों और युवा स्वयंसेवकों सहित 36 सामुदायिक नेतृत्वकर्ताओं को सम्मानित किया गया।
अनुभवों से बढ़ा भरोसा उपचार
ए.के. सिंह, जिला मलेरिया अधिकारी, कानपुर ने कहा कि गांवों में पीएसपी के सदस्य न केवल फाइलेरिया रोधी दवा का सेवन कराने में अहम भूमिका निभाते हैं, बल्कि रुग्णता प्रबंधन एवं दिव्यांगता उपचार (एमएमडीपी) प्रशिक्षण में भी सक्रिय रहते हैं।
लखनऊ के माल निवासी कोटेदार संगीता यादव ने कहा कि उन्होंने एमडीए अभियान के बारे में पहले भी कई लोगों से सुना था, लेकिन पीएसपी के माध्यम से वह स्वयं इस मुहिम से जुड़ीं। अब वह समुदाय में लोगों को फाइलेरिया के प्रति जागरूक करने और उन्हें दवा सेवन के लिए प्रेरित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
कानपुर निवासी लगभग 70 वर्षीय फाइलेरिया चैंपियन महेंद्र कुमार ने कहा, “मैं लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खाने के लिए इसलिए प्रेरित करता हूं, ताकि उन्हें वह सब न झेलना पड़े जो मैंने अपनी जिंदगी में झेला है।” उन्होंने कहा कि वह लोगों को जागरूक करने के लिए जहां भी बुलाया जाता है, वहां जाते हैं। उनका लक्ष्य अपने गांव, जनपद और प्रदेश को फाइलेरिया मुक्त बनाना है।
बाराबंकी के टीपाहार आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सीएचओ नेहा वर्मा ने बताया कि समुदाय और मरीजों की भागीदारी से दवा सेवन बढ़ाने में मदद मिली है। फरवरी में एमडीए अभियान के दौरान सभी संबंधित लोगों के साथ मिलकर रणनीति बनाई गई, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 98 प्रतिशत लोगों ने दवा का सेवन किया।
कार्यक्रम में निदेशक संचारी रोग डॉ. रेखा रानी, संयुक्त निदेशक मलेरिया डॉ. विकास सिंघल, विभिन्न जनपदों के संचारी रोग नोडल अधिकारी, जिला मलेरिया अधिकारी, पंचायती राज, खाद्य एवं रसद तथा शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), जीएचएस, पाथ, प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल (पीसीआई) और सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफार) के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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