Twisha Sharma की संदिग्ध मौत का मामला मध्य प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। 12 मई 2026 को भोपाल में हुई इस घटना के बाद पुलिस, न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर जांच जारी है। मामले में कई कानूनी और जांच संबंधी घटनाक्रम सामने आए हैं।
जांच में नए घटनाक्रम
भोपाल पुलिस ने मामले में पूर्व न्यायाधीश Giribala Singh को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में सहयोग नहीं मिलने की स्थिति में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
इसी बीच, मध्य प्रदेश शासन ने उपभोक्ता आयोग में उनके पद से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया भी शुरू की है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों द्वारा नियमों के अनुसार जांच की जा रही है।
पति अब भी जांच के दायरे में
मृतका के पति Samarth Singh फिलहाल पुलिस जांच के दायरे में हैं। पुलिस ने उनकी तलाश के लिए विभिन्न स्थानों पर टीमें भेजी हैं। अधिकारियों के अनुसार, मामले से जुड़े सभी तथ्यों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है।
हाईकोर्ट में याचिका
मामला अब Madhya Pradesh High Court तक पहुंच चुका है। मृतका के परिवार की ओर से दायर याचिका में मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। कुछ पक्षों द्वारा मामले की जांच Central Bureau of Investigation को सौंपने की मांग भी उठाई गई है।
परिवार के आरोप
मृतका के परिवार ने विवाह के बाद प्रताड़ना और दहेज संबंधी आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि ट्विशा ने अपनी मां से अंतिम बातचीत के दौरान मानसिक तनाव की बात कही थी। पुलिस इन दावों की सत्यता की जांच कर रही है।
पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी के कारण दम घुटने की बात सामने आई है। हालांकि, रिपोर्ट में शरीर पर कुछ चोटों के निशान भी दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ये चोटें किन परिस्थितियों में लगीं।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल रिकॉर्ड की भी फॉरेंसिक जांच जारी है।
दर्ज धाराएं
भोपाल की कटारा हिल्स पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है।
निष्कर्ष
ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला फिलहाल जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। पुलिस, फॉरेंसिक टीम और अदालत मामले से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रहे हैं। अंतिम निष्कर्ष जांच और अदालत की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।