बच्चे किसी भी राष्ट्र की सबसे मूल्यवान धरोहर होते हैं। विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का सपना तभी साकार हो सकता है, जब बच्चों को सुरक्षित, स्वस्थ, शिक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के बच्चे कल के वैज्ञानिक, शिक्षक, चिकित्सक, प्रशासक और जनप्रतिनिधि बनेंगे। इसलिए उनके सर्वांगीण विकास में निवेश करना देश और प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य में निवेश करने के समान है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य सुविधाएं और नैतिक मूल्यों का विकास बच्चों को सशक्त नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
आज आवश्यकता है कि बाल श्रम, बाल विवाह, बाल शोषण तथा बच्चों के विरुद्ध होने वाले अन्य अपराधों को रोकने पर पुरजोर बल दिया जाए। समाज, परिवार और प्रशासन को मिलकर बच्चों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। बच्चों को भयमुक्त और प्रेरणादायक वातावरण प्रदान कर ही उन्हें अपनी प्रतिभा विकसित करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश सरकार एवं केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं बच्चों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन प्रयासों से शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं।
विश्व बाल दिवस एवं निषेध दिवस हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि प्रत्येक बच्चे को उसके अधिकार प्राप्त हों और वह अपने सपनों को साकार कर सके। यही बच्चे विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव हैं।