छत्तीसगढ़ में में धूमधाम से मनाया गया रक्षाबंधन एवं भोजली का पर्व,
रक्षाबंधन के साथ ही उसके दूसरे दिन शाम को छत्तीसगढ़ का पारंपरिक पर्व भोजली बड़े धूमधाम से मनाया गया, रक्षाबंधन के दिन दूर दूर से भाई अपने बहनों के घर गए एवं बहनों से राखी बंधवाई। दूसरे दिन शाम को भोजली विसर्जन का पारंपरिक पर्व मनाया गया। हफ्ते महीने भर से घरों में बैठाई गई भोजली दाई को महिलाएं शाम के समय गाजे बाजे के साथ ग्राम स्थित तालाबों में विसर्जन के लिए ले गईं। रक्षाबंधन से एक तरफ भाई बहनों के बीच प्रेम और प्यार की भावना सुदृढ़ होती है उसी तरह भोजली पर्व में अच्छी फसल की कामना की जाती है साथ हीभोजली एक दूसरे के कानों में खोंसकर मितान बदने की प्रकृया पूरी की जाती है। जिससे जन जन में मैत्री भाव एवं सहयोग की भावना को बल मिलता है। भोजली त्योहार मनाने की परंपरा क्षेत्र में सदियों से चली आ रही है जिसे आज भी यहां कायम रखा गया है।