*नया चांद और शाम की खामोशी* *चाँद का दिलकश नज़ारा* *(आनन्द कुमार द्विवेदी/कौशाम्बी ब्यूरो)*
नया चांद और शाम की खामोशी: आसमान में दिखेगा चंद्रमा और शुक्र का दिलकश नज़ारा
(आनन्द कुमार द्विवेदी/कौशाम्बी ब्यूरो)
नारा, कौशाम्बी। आसमान की गोद में दिखाई देने वाला खूबसूरत चांद अपनी शीतल रोशनी से रात के आकाश को आकर्षक बना देता है। साफ आसमान में चंद्रमा और चमकीले शुक्र ग्रह का नजारा लोगों के लिए खास खगोलीय दृश्य हो सकता है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस घटना का स्वरूप और इसे देखने का समय अलग-अलग रहेगा।
मध्य और दक्षिण भारत में लूनर ऑकल्टेशन
मध्य और दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों, जैसे बेंगलुरु और मुंबई, में लूनर ऑकल्टेशन यानी चंद्रमा द्वारा शुक्र ग्रह के कुछ समय के लिए ढक जाने की घटना दिखाई देगी। यह घटना दिन के उजाले और गोधूलि के समय के आसपास होगी।
शुक्र के छिपने की शुरुआत: शाम करीब 5:20 बजे IST पर शुक्र ग्रह चंद्रमा के अंधेरे हिस्से के पीछे छिपना शुरू होगा। इस समय उजाला होने के कारण बिना दूरबीन या बाइनोक्युलर के इसे देख पाना मुश्किल हो सकता है।
शुक्र के दोबारा दिखाई देने का समय: शाम करीब 6:41 बजे IST पर शुक्र ग्रह चंद्रमा के चमकदार हिस्से से बाहर निकलेगा। इस समय सूर्यास्त के बाद का गोधूलि वातावरण होने के कारण इसे देखने की संभावना बेहतर रहेगी।
उत्तर और पूर्व भारत में चंद्रमा-शुक्र का नजारा
उत्तर और पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, जैसे दिल्ली, लखनऊ और कोलकाता में चंद्रमा शुक्र ग्रह को पूरी तरह ढकता हुआ दिखाई नहीं देगा। यहां सूर्यास्त के बाद शाम करीब 6:45 बजे से 7:30 बजे के बीच पश्चिम-दक्षिणपश्चिम दिशा में चंद्रमा और शुक्र ग्रह का सुंदर कंजंक्शन देखा जा सकता है।
इस दौरान पतला चंद्रमा लगभग 12–13 प्रतिशत रोशन दिखाई देगा और उसके पास चमकीला शुक्र ग्रह नजर आएगा।
बिना दूरबीन के देखने के आसान टिप्स
सही दिशा: सूर्यास्त के तुरंत बाद खुले स्थान से पश्चिम-दक्षिणपश्चिम दिशा में, क्षितिज के पास आसमान की ओर देखें।
रुकावट मुक्त क्षितिज: चंद्रमा और शुक्र ग्रह अपेक्षाकृत नीचे दिखाई दे सकते हैं। इसलिए ऐसी जगह चुनना बेहतर रहेगा जहां सामने ऊंची इमारतें, पेड़ या अन्य बड़ी रुकावटें न हों।
शुक्र ग्रह की पहचान: चंद्रमा के पास एक बेहद चमकीला पिंड दिखाई दे सकता है। यही शुक्र ग्रह है, जो अपनी चमक के कारण आसानी से ध्यान आकर्षित करता है।
अर्थशाइन: अनुकूल परिस्थितियों में चंद्रमा के कम रोशन हिस्से पर पृथ्वी से परावर्तित प्रकाश की हल्की चमक भी दिखाई दे सकती है। इसे अर्थशाइन कहा जाता है और यह दृश्य को और आकर्षक बना सकता है।
खगोलीय घटना को देखने के लिए साफ मौसम और खुले क्षितिज वाली जगह चुनना उपयोगी रहेगा। अलग-अलग स्थानों पर दृश्यता और समय में अंतर हो सकता है।