*ब्राजील में संकट, भारत में मांग, बेलगाम हुए चीनी के दाम, आ गई चेतावनी* *आनंद कुमार द्विवेदी/कौशाम्बी ब्यूरो*
ब्राजील में सप्लाई बाधा, भारत में मांग से चीनी के दाम 17 महीने के उच्च स्तर पर
आनंद कुमार द्विवेदी/कौशाम्बी ब्यूरो
अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारणों से चीनी के दाम 17 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। ब्राजील में सप्लाई बाधाओं और भारत में बढ़ती मांग के बीच सरकार ने टैक्स-फ्री इंपोर्ट को मंजूरी दी है। त्योहारों के दौरान जमाखोरी और मुनाफाखोरी रोकने के लिए सरकार ने मिलों को पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने और उचित कीमतों पर चीनी बेचने की चेतावनी दी है।
भारत से आयात की मजबूत मांग और दुनिया के सबसे बड़े उत्पादक ब्राजील में गन्ने की पेराई में देरी हो रही है। इसके कारण कच्ची चीनी के वायदा भाव मार्च 2025 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। यह सब तब है जब खाद्य मंत्रालय ने त्योहारों के मौसम में बिना ठोस वजह के कीमतें बढ़ाने के खिलाफ घरेलू मिलों को चेतावनी दी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यूयॉर्क में वायदा भाव 1.6 फीसदी तक बढ़े। इस हफ्ते अब तक लगभग 3 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। इस साल कच्ची चीनी की कीमतों में लगभग 30 फीसदी की तेजी आई है। कारण है कि 2026-27 के सीजन में ग्लोबल स्थिति सरप्लस (अतिरिक्त सप्लाई) से बदलकर कमी (शॉर्टेज) की ओर बढ़ रही है। इंटरनेशनल शुगर ऑर्गनाइजेशन ने आने वाले सीजन में लगभग 2,60,000 टन की ग्लोबल कमी का अनुमान लगाया है।
अगस्त में घरेलू कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं
भारत ने अगस्त में घरेलू कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद 10 लाख टन का टैक्स-फ्री आयात कोटा खोला था। यह देश के लिए एक बड़ा कदम था। भारत दुनिया के प्रमुख चीनी निर्यातकों और बड़े उत्पादकों में से एक रहा है।
खाद्य मंत्रालय में चीनी मामलों के संयुक्त सचिव अश्विनी श्रीवास्तव ने नई दिल्ली में इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस में कहा कि तब से भारतीय मिलों ने लगभग 800,000 टन कच्ची चीनी यानी कुल कोटे का लगभग 80 फीसदी आयात करने की मंजूरी मांगी है।
उन्होंने कहा कि रिफाइनरों ने घरेलू बाजार में बेचने के लिए अतिरिक्त 2,65,000 टन चीनी की बिक्री की अनुमति भी मांगी है। इसे पहले री-एक्सपोर्ट के लिए रखा गया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत लगभग एक दशक में पहली बार ब्राजील से चीनी का आयात कर रहा है।
चीनी मिलों को दी गई चेतावनी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को अलग से बात करते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार ने चीनी मिलों से त्योहारों के मौसम में पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने और उचित कीमतों पर चीनी बेचने को कहा है। साथ ही जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कदम उठाने की बात कही है।
उन्होंने कहा कि पिछले महीने कीमतों में आई तेजी मांग में अचानक बढ़ोतरी के कारण नहीं है। इसके बजाय त्योहारों के दौरान कीमतों में और बढ़ोतरी की उम्मीद में की गई जमाखोरी को भी इसकी एक वजह माना गया है।
अभी भी दाम 20% ज्यादा
भारत में आमतौर पर अगस्त और नवंबर के बीच चीनी की मांग बढ़ जाती है। इस दौरान गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार होते हैं। तब पारंपरिक मिठाइयों और कन्फेक्शनरी की खपत बढ़ जाती है।
रॉयटर्स के अनुसार, पिछले महीने रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद हाल के दिनों में कीमतें कुछ कम हुई हैं। लेकिन ये अभी भी दो महीने पहले की तुलना में लगभग 20 फीसदी ज्यादा हैं।
श्रीवास्तव ने कहा कि कीमतें काबू में रखने के मकसद से पॉलिसी बनाने में सुधार के लिए सरकार हर महीने चीनी उत्पादन पर नजर रखेगी। उन्होंने यह भी कहा कि मिलों से उत्पादन और बिक्री का सही मासिक डेटा देने को कहा गया है।
सप्लाई के मोर्चे पर मजबूत होते अल नीनो को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि इसका असर पूरे एशिया में फसलों पर पड़ सकता है। भारत में सूखे जैसे हालात बनने की आशंका भी जताई गई है।
चीनी के दामों को सहारा दे रही हैं तेल की बढ़ती कीमतें
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, देश में मॉनसून सीजन के दौरान 9 सितंबर तक बारिश सामान्य स्तर से लगभग 15 फीसदी कम रही है। यह इस महीने खत्म हो रहा है और इस पर गन्ने की फसल निर्भर करती है।
ब्लूमबर्ग की ओर से बताए गए स्टोनएक्स के एनालिस्ट राफेल क्रेस्टाना के नोट के अनुसार, ब्राजील के सेंटर-साउथ इलाके में भारी बारिश से गन्ने की पेराई (क्रशिंग) में रुकावट आ रही है। साओ पाउलो राज्य के मुख्य उत्पादक इलाकों में और बारिश का अनुमान है।
तेल की बढ़ती कीमतें भी चीनी की कीमतों को सहारा दे सकती हैं। कारण है कि इससे मिलों को ज्यादा गन्ना इथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे चीनी का उत्पादन कम हो सकता है।