LATEST NEWS

विष्णु जी विश्राम पर महादेव संभालेंगे कमान

By ANJANI MISHRA • 2026-07-23 07:28 • 3 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
विष्णु जी विश्राम पर महादेव संभालेंगे कमान

विष्णु जी विश्राम पर महादेव संभालेंगे कमान

यह पंक्ति सनातन धर्म में 'चातुर्मास' (विशेषकर हरिशयनी एकादशी) के धार्मिक महत्व को दर्शाती है। हिंदू पुराणों के अनुसार, भगवान विष्णु आषाढ़ माह की एकादशी से चार महीने के लिए क्षीर सागर में योग निद्रा (विश्राम) पर चले जाते हैं। इस दौरान ब्रह्मांड का संचालन और रक्षा की जिम्मेदारी भगवान शिव (महादेव) संभालते हैं।
वर्ष 2026 में चातुर्मास 25 जुलाई (देवशयनी एकादशी) से शुरू होकर 20 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक रहेगा。 इस चार महीने की अवधि में सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास आते

धार्मिक महत्व और व्यवस्था विष्णु जी का शयन: हरिशयनी एकादशी से भगवान विष्णु विश्राम करते हैं।महादेव की कमान: विष्णु जी के विश्राम काल में शिव जी सृष्टि के पालनहार बनते हैं।चातुर्मास की शुरुआत: यह चार महीनों का समय 'चातुर्मास' कहलाता है।सावन का विशेष महत्व: इस काल में आने वाला सावन का महीना पूरी तरह शिव आराधना को समर्पित होता है।चातुर्मास में क्या करें और क्या न करें?शुभ कार्य वर्जित: इन चार महीनों में विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं होते हैं।भक्ति का समय: यह समय केवल साधना, तप, दान और पूजा-पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।देवउठनी एकादशी: कार्तिक मास की एकादशी को विष्णु जी जागते हैं, जिसके बाद पुनः सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं।
विष्णु और शिव एक ही सिक्के के दो पहलू हैं—शिव ध्यान व वैराग्य के प्रतीक हैं, तो विष्णु संसार के कर्म और संतुलन के प्रतीक हैं!

चातुर्मास का मुख्य महत्व निम्नलिखित है:आध्यात्मिक जागृति: इन चार महीनों में संत और मुनि एक ही स्थान पर रहकर ध्यान, स्वाध्याय और तपस्या करते हैं。 सांसारिक मोह-माया से दूर रहकर ईश्वर की आराधना करने के लिए यह सर्वोत्तम समय माना जाता है。स्वास्थ्य और संयम: वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से, वर्षा ऋतु में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है。 इसलिए इन चार महीनों में खान-पान (जैसे हरी सब्जियां, दही, दूध और उड़द दाल का क्रमिक त्याग) में संयम बरतने से शरीर निरोगी और शुद्ध रहता है。मानसिक शांति: व्रत और उपवास करने से मानसिक चंचलता दूर होती है。 चातुर्मास में गीता पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम और सत्संग सुनने से मन को असीम शांति मिलती है。मांगलिक कार्यों का विराम: इन चार महीनों में विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे शुभ कर्म वर्जित होते हैं, ताकि लोग अपना पूरा ध्यान आत्म-चिंतन और धर्म-कर्म में लगा सकें
चातुर्मास में महादेव की पूजा और सावन के महीने का महत्व निम्नलिखित है:सृष्टि के संरक्षक: देवशयनी एकादशी से आरंभ होकर देवोत्थान एकादशी तक चलने वाले इस काल में शिव जी भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और इस दौरान उनकी आराधना सबसे शीघ्र फलदायी मानी जाती है।सावन मास का विशेष महत्व: चातुर्मास का पहला महीना श्रावण (सावन) पूरी तरह से भगवान शिव को समर्पित होता है। इस पवित्र मास में शिवलिंग पर रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पित करने से कुंडली के ग्रह दोष और मानसिक तनाव दूर होते हैं।कल्याणकारी और विनाशक: पौराणिक कथाओं के अनुसार, महादेव ने सृष्टि की भलाई के लिए हलाहल विष का पान किया था, इसलिए इस काल में उनकी पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट और रोग दूर हो जाते हैं।चातुर्मास के दौरान किए गए जप, तप, और शिव उपासना से साधक को मोक्ष और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है। इस अवधि में शिव भक्ति करने से साधकों को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती
रिपोर्ट अंजनी मिश्रा

#.
ANJANI MISHRA 0 followers