योगी राज में न्याय के लिए धरने की नौबत! जमीन विवाद में तीन महिलाओं ने दी आमरण अनशन की चेतावनी
प्रतापगढ़ के सरुआ गांव में जमीन पर कथित निर्माण का मामला, तीन महिलाओं ने धरने की चेतावनी दी
प्रतापगढ़: लालगंज तहसील क्षेत्र के सरुआ गांव में जमीन पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। तीन महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उनकी भूमिधरी जमीन पर निर्माण कराया जा रहा है और शिकायत के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। महिलाओं ने 31 अगस्त से तहसील कार्यालय के सामने धरना देने और आमरण अनशन की चेतावनी दी है।
सरुआ गांव निवासी अनीता देवी, रीता देवी और गीता देवी ने उपजिलाधिकारी लालगंज को दिए शिकायती पत्र में अपनी जमीन पर कथित रूप से जबरन निर्माण किए जाने का आरोप लगाया है। महिलाओं के अनुसार, मामले में प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद निर्माण कार्य को लेकर उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
जमीन पर निर्माण को लेकर लगाया आरोप
शिकायत के अनुसार, गांव में गाटा संख्या 726, रकबा 0.659 हेक्टेयर और गाटा संख्या 737, रकबा 0.295 हेक्टेयर भूमि उनकी भूमिधरी जमीन है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि गांव के प्रधान विजय बहादुर, रणजीत, राजाराम पुत्रगण हीरालाल वर्मा और सरस्वती देवी पत्नी हीरालाल द्वारा उनकी जमीन पर कथित रूप से पक्का निर्माण कराया जा रहा है।
महिलाओं का कहना है कि उन्होंने निर्माण का विरोध किया। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके साथ गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
एसडीएम से कार्रवाई की मांग
महिलाओं के मुताबिक, उन्होंने मामले को लेकर उपजिलाधिकारी लालगंज से शिकायत की। उनका दावा है कि 27 अगस्त को एसडीएम लालगंज ने सांगीपुर थानाध्यक्ष से फोन पर बात कर निर्माण रोकने के निर्देश दिए थे।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इसके बावजूद 30 अगस्त तक मौके पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसी के बाद तीनों महिलाओं ने 31 अगस्त से धरना और आमरण अनशन की चेतावनी दी है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी नजर
मामला जमीन के स्वामित्व, कथित निर्माण और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा है। ऐसे मामलों में राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति के आधार पर संबंधित अधिकारियों की जांच महत्वपूर्ण होती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी शिकायतकर्ताओं के आरोपों पर आधारित है।
मामले में नामित विजय बहादुर, रणजीत, राजाराम और सरस्वती देवी का पक्ष इस रिपोर्ट के समय सामने नहीं आया है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना उचित होगा।