सबरीमाला के सोने पर 'स्ट्रिपिंग सॉल्ट' का खेल ! NML की जांच में खुला स्वर्ण चोरी का राज
सबरीमाला स्वर्ण चोरी मामले में NML की वैज्ञानिक जांच से सोना हटाने की प्रक्रिया के संकेत
जमशेदपुर: सबरीमाला मंदिर के स्वर्ण चोरी मामले में जमशेदपुर स्थित राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (NML) के वैज्ञानिकों की जांच से सोने को तांबे के पैनलों से अलग किए जाने की कथित प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। वैज्ञानिक जांच के अनुसार, स्वर्ण जड़ित तांबे के पैनलों से मूल सोना हटाने के लिए ‘स्ट्रिपिंग सॉल्ट’ नामक रासायनिक मिश्रण के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं।
वैज्ञानिक परीक्षण के दौरान स्वर्ण जड़ित तांबे की प्लेटों को स्ट्रिपिंग सॉल्ट के घोल में रखने पर सोना घोल में अलग हो गया, जबकि तांबे की प्लेट सुरक्षित रही। जांच एजेंसियों के अनुसार, इसी तरह की रासायनिक प्रक्रिया का इस्तेमाल कथित तौर पर मंदिर के मूल सोने को हटाने में किया गया हो सकता है।
2019 में सामने आया था मामला
यह मामला वर्ष 2019 में सामने आया था। भगवान अयप्पा मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों और गर्भगृह के दरवाजों पर लगे स्वर्ण पैनलों को पॉलिश और मरम्मत के लिए चेन्नई की संस्था स्मार्ट क्रीएशंस भेजा गया था। एसआईटी की जांच में कथित तौर पर सामने आया कि सोना हटाने में इस्तेमाल किए गए रसायन को मुंबई से मंगाया गया था।
इस मामले में उन्नीकृष्णन पोट्टी को मुख्य आरोपी बताया गया है। जांच के दौरान सोना हटाने के साथ-साथ कथित तौर पर उसके निशान मिटाने की कोशिश किए जाने के पहलू की भी जांच की गई।
पैनलों पर नैनो लेयर के संकेत
एनएमएल के वैज्ञानिकों ने स्पेक्ट्रोस्कोपी और एक्स-रे तकनीक समेत आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से पैनलों की जांच की। जांच में पैनलों के साथ छेड़छाड़ के संकेत मिलने की बात सामने आई है। वैज्ञानिकों के अनुसार, मूल सोना हटाए जाने के बाद तांबे की सतह पर सोने की बेहद महीन नैनो लेयर चढ़ाए जाने के संकेत मिले।
जांच में मरकरी यानी पारा और अन्य रसायनों के इस्तेमाल के संकेत मिलने की भी जानकारी सामने आई है। वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर पैनलों की मूल संरचना और बाद में की गई प्रक्रिया के बीच अंतर का अध्ययन किया गया है।
430 गवाहों के बयान, चार्जशीट की तैयारी
इस मामले में पुलिस अब तक करीब 430 गवाहों के बयान दर्ज कर चुकी है। एनएमएल के अधिकारी और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के प्रतिनिधि अभियोजन पक्ष के महत्वपूर्ण गवाहों में शामिल हो सकते हैं।
हाईकोर्ट के निर्देश पर मामले की जांच कर रही एसआईटी अब अंतिम चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। ऐसे में एनएमएल की वैज्ञानिक रिपोर्ट मामले में महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्यों में से एक हो सकती है।
सबरीमाला के स्वर्ण चोरी मामले में अब जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि पैनलों से कथित तौर पर सोना किस प्रक्रिया के जरिए हटाया गया और बाद में पैनलों में किस तरह बदलाव किए गए। एसआईटी की अंतिम चार्जशीट और अदालत में पेश किए जाने वाले वैज्ञानिक साक्ष्यों से मामले के इन पहलुओं पर आगे स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।