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सावन मास का महत्व

By ANJANI MISHRA • 2026-08-01 09:18 • 4 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
सावन मास का महत्व

हिन्दू धर्म में सावन (श्रावण) मास भगवान शिव की आराधना, प्रकृति के श्रृंगार और प्रमुख त्योहारों का सबसे पवित्र मास माना जाता है। इस महीने में शिव कृपा पाने के लिए सोमवार व्रत, कांवड़ यात्रा और हरियाली तीज व रक्षाबंधन जैसे कई बड़े त्योहार मनाए जाते हैं।

सावन मास भगवान शिव की आराधना, प्रकृति के
श्रृंगार और आत्मिक शुद्धि का सबसे पवित्र मास है, जो इस वर्ष उत्तर भारत में 30 जुलाई 2026 से 28 अगस्त 2026 तक मनाया जा रहा है। यह मास शिव-पार्वती मिलन, समुद्र मंथन से जुड़े हलाहल विषपान प्रसंग और कांवड़ यात्रा के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।



धार्मिक एवं पौराणिक महत्वशिव आराधना: यह पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित है।
शिव-पार्वती मिलन: माता पार्वती ने इसी मास में भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था।चातुर्मास का प्रभाव: भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद सृष्टि के संचालन का दायित्व शिव जी पर होता है।

प्रमुख परंपराएं और अनुष्ठानसावन सोमवार व्रत: महादेव की कृपा पाने के लिए सोमवार को विशेष उपवास और जलाभिषेक किया जाता है।कांवड़ यात्रा: भक्त पवित्र नदियों से गंगाजल लाकर शिवालयों में अर्पित करते हैं।मंगला गौरी व्रत: सुहागन महिलाएं मंगलवार को माता गौरी की पूजा कर परिवार की आरोग्यता की कामना करती हैं।


स्वास्थ्य और संयम के नियमसात्विक आहार: इस दौरान तामसिक भोजन, मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का त्याग किया जाता है।स्वास्थ्य लाभ: आयुर्वेद और परंपरा के अनुसार, इस ऋतु में पाचन शक्ति धीमी होने के कारण उपवास शरीर को हल्का और मन को शांत रखता है।


प्रमुख त्योहार और व्रतसावन सोमवार व्रत: इस महीने के हर सोमवार को सुखी जीवन और मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष रूप से शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाया जाता है।मंगला गौरी व्रत: मंगलवार के दिन सुहागिन महिलाएं माता गौरी की पूजा कर परिवार की लंबी उम्र और मंगल की कामना करती हैं।हरियाली तीज: यह पर्व प्रकृति की हरियाली और सुहाग की अखंडता का प्रतीक है, जिसे महिलाएं झूला झूलकर और व्रत रखकर मनाती हैं।नाग पंचमी: इस दिन नाग देवता की पूजा कर उन्हें दूध अर्पित किया जाता है और उनकी रक्षा की प्रार्थना की जाती है।रक्षाबंधन: सावन पूर्णिमा के दिन भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक यह त्योहार मनाया जाता है, जिसमें बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं।

रिपोर्ट
अंजनी मिश्रा

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