उत्तराखंड की ‘मेरे बुजुर्ग, मेरे तीर्थ’ योजना: सिर्फ चारधाम नहीं, अनेक तीर्थों तक निःशुल्क यात्र
देहरादून, 20 जून। उत्तराखंड सरकार एवं पर्यटन विभाग द्वारा संचालित पंडित दीन दयाल मातृ-पितृ तीर्थाटन योजना राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क तीर्थयात्रा का अवसर प्रदान कर रही है।
योजना के अंतर्गत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र वरिष्ठ नागरिकों को यात्रा, आवास, भोजन तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। चलने-फिरने में असमर्थ बुजुर्गों को विशेष परिस्थितियों में एक सहायक साथ ले जाने की अनुमति भी दी जाती है।
हालांकि इस योजना को अक्सर केवल चारधाम यात्रा से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन पर्यटन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न तीर्थ सर्किटों में उत्तराखंड के अनेक प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी शामिल किया गया है।
योजना के अंतर्गत शामिल प्रमुख तीर्थ स्थलों में बदरीनाथ धाम, गंगोत्री धाम, रीठा साहिब, नानकमत्ता साहिब, पिरान कलियर शरीफ, ताड़केश्वर महादेव, कालीमठ मंदिर, जागेश्वर धाम, गैराड़ गोलू देवता मंदिर, गंगोलीहाट क्षेत्र के प्रमुख तीर्थ, महासू देवता मंदिर (हनोल), कालिंका मंदिर तथा ज्वालपा देवी मंदिर शामिल हैं।
पर्यटन विभाग के अनुसार, समय-समय पर उपलब्ध तीर्थ सर्किटों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के आधार पर यात्राओं का संचालन किया जाता है। हाल के वर्षों में वरिष्ठ नागरिकों को उनकी पसंद और उपलब्ध तीर्थ सर्किटों के अनुसार विभिन्न धार्मिक स्थलों की यात्रा कराने की व्यवस्था भी की गई है।
चारधाम यात्रा सामान्यतः 10 से 12 दिनों की हिमालयी यात्रा मानी जाती है। ऐसे में यह योजना उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष महत्व रखती है, जो आर्थिक या शारीरिक कारणों से अपने जीवन में प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा नहीं कर पाए हैं।
पर्यटन विभाग का कहना है कि योजना का उद्देश्य पात्र वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक, सुरक्षित और सुविधाजनक तीर्थयात्रा उपलब्ध कराना है। राज्य सरकार विभिन्न तीर्थ सर्किटों के माध्यम से लाभार्थियों को धार्मिक स्थलों के दर्शन का अवसर प्रदान कर रही है।