(The Indian Express की रिपोर्ट पर आधारित)
West Bengal में चुनावी परिदृश्य के दूसरे चरण में मुकाबला उत्तर के सीमावर्ती क्षेत्रों से दक्षिण के शहरी और औद्योगिक इलाकों की ओर केंद्रित होता दिख रहा है। आमतौर पर राजनीतिक विमर्श All India Trinamool Congress और Bharatiya Janata Party के बीच सीधा मुकाबला दर्शाता है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि वाम-कांग्रेस गठबंधन का वोट शेयर भी कई सीटों पर प्रभाव डाल सकता है।
चुनाव आयोग के पिछले आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, 2021 के विधानसभा चुनाव में संयुक्त मोर्चा (वाम दल, कांग्रेस और अन्य सहयोगी) को सीमित सीट सफलता मिली थी, लेकिन कई निर्वाचन क्षेत्रों में उसका वोट प्रतिशत जीत के अंतर से अधिक रहा था। इससे संकेत मिलता है कि इन वोटों की दिशा चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती है।
दूसरे चरण के जिन क्षेत्रों में मतदान हुआ, उनमें कोलकाता, हावड़ा, हुगली और 24 परगना जैसे शहरी व औद्योगिक इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ऐतिहासिक रूप से वामपंथी संगठनों की उपस्थिति रही है, खासकर ट्रेड यूनियनों और स्थानीय नेटवर्क के माध्यम से।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन इलाकों में रोजगार, शहरी प्रशासन और स्थानीय मुद्दे प्रमुख रहते हैं, जिन पर विभिन्न दल अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
इस बीच, वामपंथी दलों ने हाल के वर्षों में अपने संगठन को पुनर्संगठित करने और युवा नेतृत्व को आगे लाने की कोशिश की है। पार्टी से जुड़े नेताओं ने दावा किया है कि वे रोजगार, शिक्षा और आर्थिक मुद्दों को लेकर अभियान चला रहे हैं।
हालांकि, इन दावों के साथ-साथ राजनीतिक पर्यवेक्षक यह भी मानते हैं कि राज्य में मुख्य मुकाबला अभी भी टीएमसी और भाजपा के बीच केंद्रित है, और तीसरे विकल्प के रूप में वाम-कांग्रेस की भूमिका क्षेत्रवार अलग-अलग प्रभाव डाल सकती है।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
पिछले एक दशक में वामपंथी दलों के वोट शेयर और सीटों में गिरावट दर्ज की गई है। इसके बावजूद, कुछ चुनावों और स्थानीय निकायों में उन्हें उल्लेखनीय वोट प्रतिशत प्राप्त हुआ है, जिससे उनकी सीमित लेकिन प्रभावशाली उपस्थिति बनी हुई है।
निष्कर्ष
विश्लेषण के अनुसार, पश्चिम बंगाल में चुनावी परिणामों पर छोटे वोट प्रतिशत का भी असर पड़ सकता है। ऐसे में वाम-कांग्रेस गठबंधन की भूमिका, भले ही सीमित हो, लेकिन कुछ सीटों पर निर्णायक साबित हो सकती है।