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By LALIT MOHAN BISHT • 2026-09-01 11:50 • 4 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
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उत्तराखंड में बारिश का कहर: पहाड़ से मैदान तक बिगड़े हालात, भूस्खलन और जलभराव से जनजीवन प्रभावित
देहरादून, 1 सितंबर 2026। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने एक बार फिर मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देहरादून समेत प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश के कारण सड़कें जलमग्न हो गई हैं, नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाओं से यातायात प्रभावित हुआ है। मौसम की बिगड़ी स्थिति को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को सतर्क रखा गया है।
अल्मोड़ा में दर्दनाक हादसा, भारी बारिश के बीच भूस्खलन का मलबा मकान पर गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद राहत एवं बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का कार्य किया। इस घटना से क्षेत्र में शोक की लहर है।
मसूरी-देहरादून मार्ग भी प्रभावित हुआ है। भारी बारिश के कारण सड़क पर मलबा और भूस्खलन आने से मार्ग बाधित हुआ। प्रशासन और कर्मचारियों ने कई घंटे की मशक्कत के बाद रास्ता खोला, लेकिन बारिश के दोबारा तेज होने से मार्ग फिर प्रभावित हो गया। इससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
देहरादून में भी जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भारी बारिश के बाद तमसा नदी समेत कई जलधाराओं का जलस्तर बढ़ा है। गंगा और यमुना के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए देहरादून में 1 सितंबर को कक्षा 1 से 12 तक के स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद रखा गया है। प्रशासन का यह कदम विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन, नदियों और बरसाती नालों के जलस्तर में अचानक वृद्धि तथा निचले इलाकों में जलभराव का खतरा बना हुआ है।
प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे जाने से बचने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सावधानी बरतने और मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा न करने की अपील की है।
लगातार बारिश ने एक बार फिर उत्तराखंड की आपदा संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। पहाड़ों में जहां भूस्खलन और सड़क बंद होने का खतरा बढ़ गया है, वहीं मैदानी क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ की आशंका लोगों की चिंता बढ़ा रही है।

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