*पोलिस बॉइज असोसिएशन तथा पत्रकार संघ ने पोलिस आयुक्त को सौंपा ज्ञापन।* *यातायात ( ट्राफिक ) पोलिस को गर्मियों के मौसम में विशेष सुविधा देने की मांग अमित दुबे*
*पोलिस बॉइज असोसिएशन तथा पत्रकार संघ ने पोलिस आयुक्त को सौंपा ज्ञापन।*
*यातायात ( ट्राफिक ) पोलिस को गर्मियों के मौसम में विशेष सुविधा देने की मांग अमित दुबे*
पोलिस बॉइज असोसिएशन तथा डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर श्रमजीवी पत्रकार संघ नागपुर शहर/ग्रामीण जिल्हाध्यक्ष अमित दुबे ने यातायात पोलिस कर्मचारियो को गर्मियों के मौसम में हो रही विविध समस्याओ को लेकर नागपुर शहर पोलिस आयुक्त रविंद्र सिंगल को ज्ञापन सौपा है अमित दुबे ने आयुक्त को बताया की महाराष्ट्र पुलिस के जवान 24 घंटे जनता की सेवा में रहते हुए “सदरशनाय खलनिग्रहणाय” इस प्रचार का संपूर्ण पालन करते है उनकी ड्यूटी का कोई निश्चित समय तय ना होने से उन्हें पाइल्स, बीपी, शुगर इत्यादि गंभीर बीमारीया हो जाती है कार्यभार ज्यादा होने से मानसिक तकलीफ भी होती है जिससे तंग आकर कईयों पुलिसकर्मी आत्महत्या जैसा कठोर कदम तक उठा लेते है ऐसे में यातायात पोलिस विभाग के और तो किसी का ध्यान ही नही जाता या कोई वरिष्ठ ध्यान ही देना नही चाहता चाहे आंधी हो तूफान हो या बारिश का मौसम कोई भी मौसम हो बेचारे कर्मचारी चौराहों पे ड्यूटी करते दिखाई देते है कई बार चालान कार्यवाही को लेकर विरोध करते हुवे कुछ असामाजिक तत्वों के लोग यातायात कर्मीयो से आये दिन हाथापाई करते नजर आते है ना बैठने का ठिकाना न आराम करने के लिए कोई सुरक्षित जगह दिखावे के लिए कोई चौराहे पर एक आधी बुथ दिखाई पडता है मगर उसमे मुश्किल से दो लोग ढंग से बैठ भी नही सकते ऐसे में चिलचिलाती नागपुर की धूप जो 40 से 45 डिग्री तो कभी 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाती है जिसके चलते एक आम व्यक्ति तो (एसी, कूलर) की हवा खाते नजर आता है मगर एक यातायात कर्मचारी भरी धूप में घंटो ड्यूटी पर खडा रहता है कभी ट्राफिक जाम तो कभी कोई विशेष रैली बंदोबस्त तो कभी इमरजेंसी एंबुलेस को रास्ता क्लीयर करवाना सिर्फ और सिर्फ यातायात कर्मचारीयो के नसीब में ही होता है फिर भी वे उफ तक नही करते कईयों बार ड्यूटी पे तैनात होते हुवे यदि वो किसी संशय वाले वाहनों को रोकने की कोशिश करते है तब वे वाहन चालक सीधा उनके ऊपर वाहन चढा देते है बावजूद उसके विपरीत चौराहे पर यदि कोई व्यक्ति दुर्घटना का शिकार हो जाता है तो वही यातायात कर्मी अपनी जान की परवाह किए बगैर उसकी जानमाल की रक्षा करने के लिए एडी चोटी का बल लगाकर इंसानियत का परिचय देता है फिर भी तडकती धूप में नौ तपा भी रहता है यातायात पोलिस कर्मचारियों को मई और जून के यह दो महीने जिसमे सूर्य देवता आग उगलते नजर आते है उन्हे कुछ विशेष सुरक्षा देना चाहिए आखिर वे भी एक इंसान है उन्हे सुरक्षा नही देना मानो सरासर अन्याय करने जैसा है और ये मानवता के अधिकार का उल्लघंन करने जैसा होगा इसलिए मई से जुन दो माह के लिए यातायात पोलिस को कुछ विशेष सुविधा देना ही चाहिए जो की इस प्रकार है।
1) दोपहर दो से चार के समय को बदलकर एक से पांच बजे करना क्युकी दोपहर दो से चार की धूप बेहद खतरनाक होती है उसमे नौ तपा की गर्मी असहनीय होती है।
2) यातायात कर्मचारीयो के लिए हर चौराहों पर पीने के पानी की उचित व्यवस्था करना ताकि उन्हें पीने के पानी को तरसना नही पडेगा।
3) यातायात पोलिस कर्मचारि कई बार ड्यूटी पे लेट होने के डर से अधिकारियो की डाट फटकार से बचने के लिए भूखे पेट घर से निकल जाते है ऐसे में उन्हें लू लगने की गुंजाइश और ज्यादा बड जाती है ऐसे में पोलिस वेलफेयर में जमा राशि से हर कर्मचारियों को स्पेशल भोजन थाली की उचित व्यवस्था करवानी चाहिए जिसमे दही, छाज होना अनिवार्य हो ताकी कर्मचारी को धूप न लगे यदि कर्मचारी घर से कभी भूखा निकले तो भी वो दिन भर भूखा न रहे इत्यादि यातायात कर्मचारियों से संबंधित प्रमुख मांगो को लेकर अमित दुबे ने पोलिस आयुक्त को अवगत कराया की है!