नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को “यंग लॉयर्स प्रोफेशनल असिस्टेंस फंड” बनाने का सुझाव दिया है, ताकि शुरुआती वर्षों में संघर्ष कर रहे युवा अधिवक्ताओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा सके।
न्यायालय ने कहा कि कई युवा वकील, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले, स्थायी आय और क्लाइंट बेस न होने के कारण शुरुआती वर्षों में गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हैं। इस वजह से कई प्रतिभाशाली अधिवक्ता बीच में ही मुकदमेबाजी छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
पीठ ने सुझाव दिया कि इस प्रकार का कोष हाईकोर्टों या किसी स्वायत्त निकाय के नियंत्रण में स्थापित किया जा सकता है। पात्र युवा वकीलों को शुरुआती वर्षों में मासिक स्टाइपेंड देने का भी प्रस्ताव रखा गया।
अदालत ने कोष के संभावित स्रोतों का उल्लेख करते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं का योगदान, कोर्ट फीस का एक हिस्सा तथा विभिन्न मामलों में अदालत द्वारा लगाए गए कॉस्ट की राशि इस फंड में शामिल की जा सकती है।
सुनवाई के दौरान अदालत परिसरों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठा। महिला अधिवक्ताओं द्वारा दायर जनहित याचिका में अदालत परिसर में स्वच्छ शौचालय, बार रूम और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसी सुविधाएं केवल सुविधा का विषय नहीं हैं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा और सम्मानजनक जीवन के अधिकार से जुड़ी हुई हैं।
न्यायालय ने अटॉर्नी जनरल और राज्यों के एडवोकेट जनरल्स से इस संबंध में सहायता मांगी है तथा स्पष्ट किया है कि ये सुझाव प्रारंभिक और विचारार्थ हैं।